कोई गोपी नूपुर और करधनीके घुँघरुओंको झनकारती हुई नाच और गा रही थी। वह जब बहुत थक गयी, तब उसने अपने बगलमें ही खड़े श्यामसुन्दरके शीतल करकमलको अपने दोनों स्तनोंपर रख लिया॥ १४॥✎ 2090
नृत्यन्ती गायती काचित् कूजन्नूपुरमेखला।
पार्श्वस्थाच्युतहस्ताब्जं श्रान्ताधात् स्तनयोः शिवम्॥ १४
कोई गोपी नूपुर और करधनीके घुँघरुओंको झनकारती हुई नाच और गा रही थी। वह जब बहुत थक गयी, तब उसने अपने बगलमें ही खड़े श्यामसुन्दरके शीतल करकमलको अपने दोनों स्तनोंपर रख लिया॥ १४॥
श्रीमद्भागवत महापुराण 10.33.14 · गीताप्रेस, गोरखपुर (द्वितीय खण्ड, पृष्ठ 333) · https://371ace2f.srimad-bhagavatam.pages.dev/10/33/14/इस श्लोक और इसके अर्थमें की गयी शुद्धियाँ (1)