॥ श्रीहरिः ॥
श्लोक 10.37.17
तस्यानु शंखयवनमुराणां नरकस्य च।
पारिजातापहरणमिन्द्रस्य च पराजयम्॥ १७
tasyānu śaṃkhayavanamurāṇāṃ narakasya ca|
pārijātāpaharaṇamindrasya ca parājayam|| 17
अर्थ
उसके बाद शंखासुर, कालयवन, मुर और नरकासुरका वध देखूँगा। आप स्वर्गसे कल्पवृक्ष उखाड़ लायेंगे और इन्द्रके चीं-चपड़ करनेपर उनको उसका मजा चखायेंगे॥ १७॥