श्रीमद्भागवत महापुराणगीताप्रेस, गोरखपुर — मुखपृष्ठ
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॥ श्रीहरिः ॥

श्लोक 10.4.18

दशम स्कन्ध · अध्याय 4 · अथ चतुर्थोऽध्यायः

मा शोचतं महाभागावात्मजान् स्वकृतम्भुजः।

जन्तवो न सदैकत्र दैवाधीनास्तदासते॥ १८

mā śocataṃ mahābhāgāvātmajān svakṛtambhujaḥ|

jantavo na sadaikatra daivādhīnāstadāsate|| 18

अर्थ

तुम दोनों महात्मा हो। अपने पुत्रोंके लिये शोक मत करो। उन्हें तो अपने कर्मका ही फल मिला है। सभी प्राणी प्रारब्धके अधीन हैं। इसीसे वे सदा-सर्वदा एक साथ नहीं रह सकते॥ १८॥

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