श्रीमद्भागवत महापुराणगीताप्रेस, गोरखपुर — मुखपृष्ठ
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॥ श्रीहरिः ॥

श्लोक 10.4.19

दशम स्कन्ध · अध्याय 4 · अथ चतुर्थोऽध्यायः

भुवि भौमानि भूतानि यथा यान्त्यपयान्ति च।

नायमात्मा तथैतेषु विपर्येति यथैव भूः॥ १९

bhuvi bhaumāni bhūtāni yathā yāntyapayānti ca|

nāyamātmā tathaiteṣu viparyeti yathaiva bhūḥ|| 19

अर्थ

जैसे मिट्टीके बने हुए पदार्थ बनते और बिगड़ते रहते हैं, परन्तु मिट्टीमें कोई अदल-बदल नहीं होती—वैसे ही शरीरका तो बनना-बिगड़ना होता ही रहता है; परन्तु आत्मापर इसका कोई प्रभाव नहीं पड़ता॥ १९॥

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