muktakacchaśikhāḥ kecid bhītāḥ sma iti vādinaḥ|| 34
अर्थ
कुछ देवता तो अपने अस्त्र-शस्त्र जमीनपर डाल देते हैं और हाथ जोड़कर आपके सामने अपनी दीनता प्रकट करने लगते हैं। कोई-कोई अपनी चोटीके बाल तथा कच्छ खोलकर आपकी शरणमें आकर कहते हैं कि—‘हम भयभीत हैं, हमारी रक्षा कीजिये’॥ ३४॥
केचित् प्रांजलयो दीना न्यस्तशस्त्रा दिवौकसः।
मुक्तकच्छशिखाः केचिद् भीताः स्म इति वादिनः॥ ३४
कुछ देवता तो अपने अस्त्र-शस्त्र जमीनपर डाल देते हैं और हाथ जोड़कर आपके सामने अपनी दीनता प्रकट करने लगते हैं। कोई-कोई अपनी चोटीके बाल तथा कच्छ खोलकर आपकी शरणमें आकर कहते हैं कि—‘हम भयभीत हैं, हमारी रक्षा कीजिये’॥ ३४॥
श्रीमद्भागवत महापुराण 10.4.34 · गीताप्रेस, गोरखपुर (द्वितीय खण्ड, पृष्ठ 149) · https://srimad-bhagavatam.vidhyamitra.com/10/4/34/