श्रीमद्भागवत महापुराणगीताप्रेस, गोरखपुर — मुखपृष्ठ
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॥ श्रीहरिः ॥

श्लोक 10.4.39

दशम स्कन्ध · अध्याय 4 · अथ चतुर्थोऽध्यायः

मूलं हि विष्णुर्देवानां यत्र धर्मः सनातनः।

तस्य च ब्रह्म गोविप्रास्तपो यज्ञाः सदक्षिणाः॥ ३९

mūlaṃ hi viṣṇurdevānāṃ yatra dharmaḥ sanātanaḥ|

tasya ca brahma goviprāstapo yajñāḥ sadakṣiṇāḥ|| 39

अर्थ

देवताओंकी जड़ है विष्णु और वह वहाँ रहता है, जहाँ सनातनधर्म है। सनातनधर्मकी जड़ हैं—वेद, गौ, ब्राह्मण, तपस्या और वे यज्ञ, जिनमें दक्षिणा दी जाती है॥ ३९॥

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