अवश्य ही मैं तुम्हारी छोटी बहिन हूँ। मेरे बहुत-से बच्चे मर गये हैं, इसलिये मैं अत्यन्त दीन हूँ। मेरे प्यारे और समर्थ भाई! तुम मुझ मन्दभागिनीको यह अन्तिम सन्तान अवश्य दे दो’॥ ६॥
नन्वहं ते ह्यवरजा दीना हतसुता प्रभो।
दातुमर्हसि मन्दाया अंगेमां चरमां प्रजाम्॥ ६
अवश्य ही मैं तुम्हारी छोटी बहिन हूँ। मेरे बहुत-से बच्चे मर गये हैं, इसलिये मैं अत्यन्त दीन हूँ। मेरे प्यारे और समर्थ भाई! तुम मुझ मन्दभागिनीको यह अन्तिम सन्तान अवश्य दे दो’॥ ६॥
श्रीमद्भागवत महापुराण 10.4.6 · गीताप्रेस, गोरखपुर (द्वितीय खण्ड, पृष्ठ 146) · https://371ace2f.srimad-bhagavatam.pages.dev/10/4/6/