श्रीमद्भागवत महापुराणगीताप्रेस, गोरखपुर — मुखपृष्ठ
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॥ श्रीहरिः ॥

श्लोक 10.4.9

दशम स्कन्ध · अध्याय 4 · अथ चतुर्थोऽध्यायः

सा तद्धस्तात् समुत्पत्य सद्यो देव्यम्बरं गता।

अदृश्यतानुजा विष्णोः सायुधाष्टमहाभुजा॥ ९

sā taddhastāt samutpatya sadyo devyambaraṃ gatā|

adṛśyatānujā viṣṇoḥ sāyudhāṣṭamahābhujā|| 9

अर्थ

परन्तु श्रीकृष्णकी वह छोटी बहिन साधारण कन्या तो थी नहीं, देवी थी; उसके हाथसे छूटकर तुरन्त आकाशमें चली गयी और अपने बड़े-बड़े आठ हाथोंमें आयुध लिये हुए दीख पड़ी॥ ९॥

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