जब बलरामजीके सामने ही कुब्जाने इस प्रकार प्रार्थना की, तब भगवान् श्रीकृष्णने अपने साथी ग्वालबालोंके मुँहकी ओर देखकर हँसते हुए उससे कहा—॥ ११॥
एवं स्त्रिया याच्यमानः कृष्णो रामस्य पश्यतः।
मुखं वीक्ष्यानुगानां च प्रहसंस्तामुवाच ह॥ ११
जब बलरामजीके सामने ही कुब्जाने इस प्रकार प्रार्थना की, तब भगवान् श्रीकृष्णने अपने साथी ग्वालबालोंके मुँहकी ओर देखकर हँसते हुए उससे कहा—॥ ११॥
श्रीमद्भागवत महापुराण 10.42.11 · गीताप्रेस, गोरखपुर (द्वितीय खण्ड, पृष्ठ 394) · https://srimad-bhagavatam.vidhyamitra.com/10/42/11/