जब कंसने सुना कि श्रीकृष्ण और बलरामने धनुष तोड़ डाला, रक्षकों तथा उनकी सहायताके लिये भेजी हुई सेनाका भी संहार कर डाला और यह सब उनके लिये केवल एक खिलवाड़ ही था—इसके लिये उन्हें कोई श्रम या कठिनाई नहीं उठानी पड़ी॥ २६॥
कंसस्तु धनुषो भंगं रक्षिणां स्वबलस्य च।
वधं निशम्य गोविन्दरामविक्रीडितं परम्॥ २६
जब कंसने सुना कि श्रीकृष्ण और बलरामने धनुष तोड़ डाला, रक्षकों तथा उनकी सहायताके लिये भेजी हुई सेनाका भी संहार कर डाला और यह सब उनके लिये केवल एक खिलवाड़ ही था—इसके लिये उन्हें कोई श्रम या कठिनाई नहीं उठानी पड़ी॥ २६॥
श्रीमद्भागवत महापुराण 10.42.26 · गीताप्रेस, गोरखपुर (द्वितीय खण्ड, पृष्ठ 395) · https://371ace2f.srimad-bhagavatam.pages.dev/10/42/26/