श्रीमद्भागवत महापुराणगीताप्रेस, गोरखपुर — मुखपृष्ठ
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॥ श्रीहरिः ॥

श्लोक 10.42.26

दशम स्कन्ध · अध्याय 42 · अथ द्विचत्वारिंशोऽध्यायः

कंसस्तु धनुषो भंगं रक्षिणां स्वबलस्य च।

वधं निशम्य गोविन्दरामविक्रीडितं परम्॥ २६

kaṃsastu dhanuṣo bhaṃgaṃ rakṣiṇāṃ svabalasya ca|

vadhaṃ niśamya govindarāmavikrīḍitaṃ param|| 26

अर्थ

जब कंसने सुना कि श्रीकृष्ण और बलरामने धनुष तोड़ डाला, रक्षकों तथा उनकी सहायताके लिये भेजी हुई सेनाका भी संहार कर डाला और यह सब उनके लिये केवल एक खिलवाड़ ही था—इसके लिये उन्हें कोई श्रम या कठिनाई नहीं उठानी पड़ी॥ २६॥

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