उचकाते ही उसके सारे अंग सीधे और समान हो गये। प्रेम और मुक्तिके दाता भगवान्के स्पर्शसे वह तत्काल विशाल नितम्ब तथा पीन पयोधरोंसे युक्त एक उत्तम युवती बन गयी॥ ८॥
सा तदर्जुसमानांगी बृहच्छ्रोणिपयोधरा।
मुकुन्दस्पर्शनात् सद्यो बभूव प्रमदोत्तमा॥ ८
उचकाते ही उसके सारे अंग सीधे और समान हो गये। प्रेम और मुक्तिके दाता भगवान्के स्पर्शसे वह तत्काल विशाल नितम्ब तथा पीन पयोधरोंसे युक्त एक उत्तम युवती बन गयी॥ ८॥
श्रीमद्भागवत महापुराण 10.42.8 · गीताप्रेस, गोरखपुर (द्वितीय खण्ड, पृष्ठ 393) · https://371ace2f.srimad-bhagavatam.pages.dev/10/42/8/