भगवान् श्रीकृष्णने नन्दबाबा और दूसरे व्रजवासियोंको इस प्रकार समझा-बुझाकर बड़े आदरके साथ वस्त्र, आभूषण और अनेक धातुओंके बने बरतन आदि देकर उनका सत्कार किया॥ २४॥✎ 1674
एवं सान्त्वय्य भगवान् नन्दं सव्रजमच्युतः।
वासोऽलंकारकुप्याद्यैरर्हयामास सादरम्॥ २४
भगवान् श्रीकृष्णने नन्दबाबा और दूसरे व्रजवासियोंको इस प्रकार समझा-बुझाकर बड़े आदरके साथ वस्त्र, आभूषण और अनेक धातुओंके बने बरतन आदि देकर उनका सत्कार किया॥ २४॥
श्रीमद्भागवत महापुराण 10.45.24 · गीताप्रेस, गोरखपुर (द्वितीय खण्ड, पृष्ठ 410) · https://srimad-bhagavatam.vidhyamitra.com/10/45/24/इस श्लोक और इसके अर्थमें की गयी शुद्धियाँ (1)