॥ श्रीहरिः ॥
आगमिष्यत्यदीर्घेण कालेन व्रजमच्युतः।
प्रियं विधास्यते पित्रोर्भगवान् सात्वतां पतिः॥ ३४
āgamiṣyatyadīrgheṇa kālena vrajamacyutaḥ|
priyaṃ vidhāsyate pitrorbhagavān sātvatāṃ patiḥ|| 34
अर्थ
भक्तवत्सल यदुवंशशिरोमणि भगवान् श्रीकृष्ण थोड़े ही दिनोंमें व्रजमें आयेंगे और आप दोनोंको—अपने माँ-बापको आनन्दित करेंगे॥ ३४॥
आगमिष्यत्यदीर्घेण कालेन व्रजमच्युतः।
प्रियं विधास्यते पित्रोर्भगवान् सात्वतां पतिः॥ ३४
भक्तवत्सल यदुवंशशिरोमणि भगवान् श्रीकृष्ण थोड़े ही दिनोंमें व्रजमें आयेंगे और आप दोनोंको—अपने माँ-बापको आनन्दित करेंगे॥ ३४॥
श्रीमद्भागवत महापुराण 10.46.34 · गीताप्रेस, गोरखपुर (द्वितीय खण्ड, पृष्ठ 419) · https://371ace2f.srimad-bhagavatam.pages.dev/10/46/34/