पुरीमान्का मेदःशिरा, मेदःशिराका शिवस्कन्द, शिवस्कन्दका यज्ञश्री, यज्ञश्रीका विजय और विजयके दो पुत्र होंगे—चन्द्रविज्ञ और लोमधि॥ २७॥✎ 1780
मेदःशिराः शिवस्कन्दो यज्ञश्रीस्तत्सुतस्ततः।
विजयस्तत्सुतो भाव्यश्चन्द्रविज्ञः सलोमधिः॥ २७
पुरीमान्का मेदःशिरा, मेदःशिराका शिवस्कन्द, शिवस्कन्दका यज्ञश्री, यज्ञश्रीका विजय और विजयके दो पुत्र होंगे—चन्द्रविज्ञ और लोमधि॥ २७॥
श्रीमद्भागवत महापुराण 12.1.27 · गीताप्रेस, गोरखपुर (द्वितीय खण्ड, पृष्ठ 909) · https://srimad-bhagavatam.vidhyamitra.com/12/1/27/इस श्लोक और इसके अर्थमें की गयी शुद्धियाँ (1)