श्रीमद्भागवत महापुराणगीताप्रेस, गोरखपुर — मुखपृष्ठ
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॥ श्रीहरिः ॥

श्लोक 12.13.14

द्वादश स्कन्ध · अध्याय 13 · अथ त्रयोदशोऽध्यायः

राजन्ते तावदन्यानि पुराणानि सतां गणे।

यावन्‍न दृश्यते साक्षाच्छ्रीमद्भागवतं परम्॥ १४

rājante tāvadanyāni purāṇāni satāṃ gaṇe|

yāvanna dṛśyate sākṣācchrīmadbhāgavataṃ param|| 14

अर्थ

संतोंकी सभामें तभीतक दूसरे पुराणोंकी शोभा होती है, जबतक सर्वश्रेष्ठ स्वयं श्रीमद्भागवतमहापुराणके दर्शन नहीं होते॥ १४॥✎ 1457

इस श्लोक और इसके अर्थमें की गयी शुद्धियाँ (1)
  • #1457 अक्षर (मुद्रित पृष्ठके पाठसे): श्रीमद्भागवत-महापुराणके → श्रीमद्भागवतमहापुराणके

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