श्रीमद्भागवत महापुराणगीताप्रेस, गोरखपुर — मुखपृष्ठ
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॥ श्रीहरिः ॥

श्लोक 12.13.15

द्वादश स्कन्ध · अध्याय 13 · अथ त्रयोदशोऽध्यायः

सर्ववेदान्तसारं हि श्रीभागवतमिष्यते।

तद्रसामृततृप्तस्य नान्यत्र स्याद्रतिः क्‍वचित्॥ १५

sarvavedāntasāraṃ hi śrībhāgavatamiṣyate|

tadrasāmṛtatṛptasya nānyatra syādratiḥ kvacit|| 15

अर्थ

यह श्रीमद्भागवत समस्त उपनिषदोंका सार है। जो इस रस-सुधाका पान करके छक चुका है, वह किसी और पुराण-शास्त्रमें रम नहीं सकता॥ १५॥✎ 1457

इस श्लोक और इसके अर्थमें की गयी शुद्धियाँ (1)
  • #1457 अक्षर (मुद्रित पृष्ठके पाठसे): श्रीमद्भागवत-महापुराणके → श्रीमद्भागवतमहापुराणके

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