श्रीमद्भागवत महापुराणगीताप्रेस, गोरखपुर — मुखपृष्ठ
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॥ श्रीहरिः ॥

श्लोक 12.13.17

द्वादश स्कन्ध · अध्याय 13 · अथ त्रयोदशोऽध्यायः

क्षेत्राणां चैव सर्वेषां यथा काशी ह्यनुत्तमा।

तथा पुराणव्रातानां श्रीमद्भागवतं द्विजाः॥ १७

kṣetrāṇāṃ caiva sarveṣāṃ yathā kāśī hyanuttamā|

tathā purāṇavrātānāṃ śrīmadbhāgavataṃ dvijāḥ|| 17

अर्थ

शौनकादि ऋषियो! जैसे सम्पूर्ण क्षेत्रोंमें काशी सर्वश्रेष्ठ है, वैसे ही पुराणोंमें श्रीमद्भागवतका स्थान सबसे ऊँचा है॥ १७॥✎ 1457

इस श्लोक और इसके अर्थमें की गयी शुद्धियाँ (1)
  • #1457 अक्षर (मुद्रित पृष्ठके पाठसे): श्रीमद्भागवत-महापुराणके → श्रीमद्भागवतमहापुराणके

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