हे राजन्! तुम अपनी विशुद्ध एवं विवेकवती बुद्धिको परमात्माके चिन्तनसे भरपूर कर लो और स्वयं ही अपने अन्तरमें स्थित परमात्माका साक्षात्कार करो॥ ९॥
एवमात्मानमात्मस्थमात्मनैवामृश प्रभो।
बुद्ध्यानुमानगर्भिण्या वासुदेवानुचिन्तया॥ ९
हे राजन्! तुम अपनी विशुद्ध एवं विवेकवती बुद्धिको परमात्माके चिन्तनसे भरपूर कर लो और स्वयं ही अपने अन्तरमें स्थित परमात्माका साक्षात्कार करो॥ ९॥
श्रीमद्भागवत महापुराण 12.5.9 · गीताप्रेस, गोरखपुर (द्वितीय खण्ड, पृष्ठ 931) · https://srimad-bhagavatam.vidhyamitra.com/12/5/9/