श्रीमद्भागवत महापुराणगीताप्रेस, गोरखपुर — मुखपृष्ठ
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॥ श्रीहरिः ॥

श्लोक 12.8.22

द्वादश स्कन्ध · अध्याय 8 · अथाष्टमोऽध्यायः

अन्वीयमानो गन्धर्वैर्गीतवादित्रयूथकैः।

अदृश्यतात्तचापेषुः स्वः स्त्रीयूथपतिः स्मरः॥ २२

anvīyamāno gandharvairgītavāditrayūthakaiḥ|

adṛśyatāttacāpeṣuḥ svaḥ strīyūthapatiḥ smaraḥ|| 22

अर्थ

वसन्तका साम्राज्य देखकर कामदेवने भी वहाँ प्रवेश किया। उसके साथ गाने-बजानेवाले गन्धर्व झुंड-के-झुंड चल रहे थे, उसके चारों ओर बहुत-सी स्वर्गीय अप्सराएँ चल रही थीं और अकेला काम ही सबका नायक था। उसके हाथमें पुष्पोंका धनुष और उसपर सम्मोहन आदि बाण चढ़े हुए थे॥ २२॥

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