श्रीमद्भागवत महापुराणगीताप्रेस, गोरखपुर — मुखपृष्ठ
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॥ श्रीहरिः ॥

श्लोक 12.9.32

द्वादश स्कन्ध · अध्याय 9 · अथ नवमोऽध्यायः

अथ तं बालकं वीक्ष्य नेत्राभ्यां धिष्ठितं हृदि।

अभ्ययादतिसंक्लिष्टः परिष्वक्तुमधोक्षजम्॥ ३२

atha taṃ bālakaṃ vīkṣya netrābhyāṃ dhiṣṭhitaṃ hṛdi|

abhyayādatisaṃkliṣṭaḥ pariṣvaktumadhokṣajam|| 32

अर्थ

अब मार्कण्डेय मुनि इन्द्रियातीत भगवान्‌को जो शिशुके रूपमें क्रीडा कर रहे थे और नेत्रोंके मार्गसे पहले ही हृदयमें विराजमान हो चुके थे, आलिंगन करनेके लिये बड़े श्रम और कठिनाईसे आगे बढ़े॥ ३२॥

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