श्रीमद्भागवत महापुराणगीताप्रेस, गोरखपुर — मुखपृष्ठ
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॥ श्रीहरिः ॥

श्लोक 3.11.35

तृतीय स्कन्ध · अध्याय 11 · अथैकादशोऽध्यायः

तस्यैव चान्ते कल्पोऽभूद् यं पाद्ममभिचक्षते।

यद्धरेर्नाभिसरस आसील्लोकसरोरुहम्॥ ३५

tasyaiva cānte kalpo'bhūd yaṃ pādmamabhicakṣate|

yaddharernābhisarasa āsīllokasaroruham|| 35

अर्थ

उसी परार्धके अन्तमें जो कल्प हुआ था, उसे पाद्मकल्प कहते हैं। इसमें भगवान्‌के नाभिसरोवरसे सर्वलोकमय कमल प्रकट हुआ था॥ ३५॥✎ 248

इस श्लोक और इसके अर्थमें की गयी शुद्धियाँ (1)
  • #248 शब्दोंके बीचका स्थान: भगवान् ने → भगवान्‌ने

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