श्रीमद्भागवत महापुराणगीताप्रेस, गोरखपुर — मुखपृष्ठ
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॥ श्रीहरिः ॥

श्लोक 3.15.5

तृतीय स्कन्ध · अध्याय 15 · अथ पञ्चदशोऽध्यायः

नमो विज्ञानवीर्याय माययेदमुपेयुषे।

गृहीतगुणभेदाय नमस्तेऽव्यक्तयोनये॥ ५

namo vijñānavīryāya māyayedamupeyuṣe|

gṛhītaguṇabhedāya namaste'vyaktayonaye|| 5

अर्थ

देव! आप विज्ञानबलसम्पन्‍न हैं; आपने मायासे ही यह चतुर्मुख रूप और रजोगुण स्वीकार किया है; आपकी उत्पत्तिके वास्तविक कारणको कोई नहीं जान सकता। हम आपको नमस्कार करते हैं॥ ५॥

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