श्रीमद्भागवत महापुराणगीताप्रेस, गोरखपुर — मुखपृष्ठ
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॥ श्रीहरिः ॥

श्लोक 3.19.11

तृतीय स्कन्ध · अध्याय 19 · अथैकोनविंशोऽध्यायः

तां स आपततीं वीक्ष्य भगवान् समवस्थितः।

जग्राह लीलया प्राप्तां गरुत्मानिव पन्‍नगीम्॥ ११

tāṃ sa āpatatīṃ vīkṣya bhagavān samavasthitaḥ|

jagrāha līlayā prāptāṃ garutmāniva pannagīm|| 11

अर्थ

गदाको अपनी ओर आते देखकर भगवान्‌ने, जहाँ खड़े थे वहींसे, उसे आते ही अनायास इस प्रकार पकड़ लिया, जैसे गरुड साँपिनको पकड़ ले॥ ११॥✎ 282 283 284

इस श्लोक और इसके अर्थमें की गयी शुद्धियाँ (3)
  • #282 शब्दोंके बीचका स्थान: भगवान् ने, → भगवान्‌ने,
  • #283 शब्दोंके बीचका स्थान: श्रीवराहभगवान् ने → श्रीवराहभगवान्‌ने
  • #284 शब्दोंके बीचका स्थान: भगवान् को → भगवान्‌को

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