उसकी हीरेकी दीवारोंमें बढ़िया लाल जड़े हुए थे, जो ऐसे जान पड़ते थे मानो विमानकी आँखें हों तथा उसे रंग-बिरंगे चँदोवे और बहुमूल्य सुनहरी बन्दनवारोंसे सजाया गया था॥ १९॥
चक्षुष्मत्पद्मरागाग्र्यैर्वज्रभित्तिषु निर्मितैः।
जुष्टं विचित्रवैतानैर्महार्हैर्हेमतोरणैः॥ १९
उसकी हीरेकी दीवारोंमें बढ़िया लाल जड़े हुए थे, जो ऐसे जान पड़ते थे मानो विमानकी आँखें हों तथा उसे रंग-बिरंगे चँदोवे और बहुमूल्य सुनहरी बन्दनवारोंसे सजाया गया था॥ १९॥
श्रीमद्भागवत महापुराण 3.23.19 · गीताप्रेस, गोरखपुर (प्रथम खण्ड, पृष्ठ 347) · https://371ace2f.srimad-bhagavatam.pages.dev/3/23/19/