श्रीमद्भागवत महापुराणगीताप्रेस, गोरखपुर — मुखपृष्ठ
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॥ श्रीहरिः ॥

श्लोक 3.26.40

तृतीय स्कन्ध · अध्याय 26 · अथ षड्विंशोऽध्यायः

द्योतनं पचनं पानमदनं हिममर्दनम्।

तेजसो वृत्तयस्त्वेताः शोषणं क्षुत्तृडेव च॥ ४०

dyotanaṃ pacanaṃ pānamadanaṃ himamardanam|

tejaso vṛttayastvetāḥ śoṣaṇaṃ kṣuttṛḍeva ca|| 40

अर्थ

चमकना, पकाना, शीतको दूर करना, सुखाना, भूख-प्यास पैदा करना और उनकी निवृत्तिके लिये भोजन एवं जलपान कराना—ये तेजकी वृत्तियाँ हैं॥ ४०॥

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