॥ श्रीहरिः ॥
श्लोक 3.28.13
प्रसन्नवदनाम्भोजं पद्मगर्भारुणेक्षणम्।
नीलोत्पलदलश्यामं शङ्खचक्रगदाधरम्॥ १३
prasannavadanāmbhojaṃ padmagarbhāruṇekṣaṇam|
nīlotpaladalaśyāmaṃ śaṅkhacakragadādharam|| 13
अर्थ
भगवान्का मुखकमल आनन्दसे प्रफुल्ल है, नेत्र कमलकोशके समान रतनारे हैं, शरीर नीलकमलदलके समान श्याम है; हाथोंमें शंख, चक्र और गदा धारण किये हैं॥ १३॥✎ 327