यमपुरीके कुत्तों अथवा गिद्धोंद्वारा जीते-जी उसकी आँतें खींची जाती हैं। साँप, बिच्छू और डाँस आदि डसनेवाले तथा डंक मारनेवाले जीवोंसे शरीरको पीड़ा पहुँचायी जाती है॥ २६॥
जीवतश्चान्त्राभ्युद्धारः श्वगृध्रैर्यमसादने।
सर्पवृश्चिकदंशाद्यैर्दशद्भिश्चात्मवैशसम्॥ २६
यमपुरीके कुत्तों अथवा गिद्धोंद्वारा जीते-जी उसकी आँतें खींची जाती हैं। साँप, बिच्छू और डाँस आदि डसनेवाले तथा डंक मारनेवाले जीवोंसे शरीरको पीड़ा पहुँचायी जाती है॥ २६॥
श्रीमद्भागवत महापुराण 3.30.26 · गीताप्रेस, गोरखपुर (प्रथम खण्ड, पृष्ठ 387) · https://srimad-bhagavatam.vidhyamitra.com/3/30/26/