आप प्रजाको दण्ड देनेवाले भगवान् यम ही हैं। माण्डव्य ऋषिका शाप होनेके कारण ही आपने श्रीव्यासजीके वीर्यसे उनके भाई विचित्रवीर्यकी भोगपत्नी दासीके गर्भसे जन्म लिया है॥ २०॥✎ 210211
माण्डव्यशापाद्भगवान् प्रजासंयमनो यमः।
भ्रातुः क्षेत्रे भुजिष्यायां जातः सत्यवतीसुतात्॥ २०
आप प्रजाको दण्ड देनेवाले भगवान् यम ही हैं। माण्डव्य ऋषिका शाप होनेके कारण ही आपने श्रीव्यासजीके वीर्यसे उनके भाई विचित्रवीर्यकी भोगपत्नी दासीके गर्भसे जन्म लिया है॥ २०॥
श्रीमद्भागवत महापुराण 3.5.20 · गीताप्रेस, गोरखपुर (प्रथम खण्ड, पृष्ठ 255) · https://371ace2f.srimad-bhagavatam.pages.dev/3/5/20/इस श्लोक और इसके अर्थमें की गयी शुद्धियाँ (2)