श्रीमद्भागवत महापुराणगीताप्रेस, गोरखपुर — मुखपृष्ठ
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॥ श्रीहरिः ॥

श्लोक 4.11.9

चतुर्थ स्कन्ध · अध्याय 11 · अथैकादशोऽध्यायः

नन्वेकस्यापराधेन प्रसंगाद् बहवो हताः।

भ्रातुर्वधाभितप्तेन त्वयांग भ्रातृवत्सल॥ ९

nanvekasyāparādhena prasaṃgād bahavo hatāḥ|

bhrāturvadhābhitaptena tvayāṃga bhrātṛvatsala|| 9

अर्थ

बेटा! तुम्हारा अपने भाईपर बड़ा अनुराग था, यह तो ठीक है; परन्तु देखो, उसके वधसे सन्तप्त होकर तुमने एक यक्षके अपराध करनेपर प्रसंगवश कितनोंकी हत्या कर डाली॥ ९॥

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