श्रीमैत्रेयजीने कहा—विदुरजी! एक बार राजर्षि अंगने अश्वमेध-महायज्ञका अनुष्ठान किया। उसमें वेदवादी ब्राह्मणोंके आवाहन करनेपर भी देवतालोग अपना भाग लेने नहीं आये॥ २५॥
अंगोऽश्वमेधं राजर्षिराजहार महाक्रतुम्।
नाजग्मुर्देवतास्तस्मिन्नाहूता ब्रह्मवादिभिः॥ २५
श्रीमैत्रेयजीने कहा—विदुरजी! एक बार राजर्षि अंगने अश्वमेध-महायज्ञका अनुष्ठान किया। उसमें वेदवादी ब्राह्मणोंके आवाहन करनेपर भी देवतालोग अपना भाग लेने नहीं आये॥ २५॥
श्रीमद्भागवत महापुराण 4.13.25 · गीताप्रेस, गोरखपुर (प्रथम खण्ड, पृष्ठ 475) · https://371ace2f.srimad-bhagavatam.pages.dev/4/13/25/