॥ श्रीहरिः ॥
आक्रीडे क्रीडतो बालान् वयस्यानतिदारुणः।
प्रसह्य निरनुक्रोशः पशुमारममारयत्॥ ४१
ākrīḍe krīḍato bālān vayasyānatidāruṇaḥ|
prasahya niranukrośaḥ paśumāramamārayat|| 41
अर्थ
वह ऐसा क्रूर और निर्दयी था कि मैदानमें खेलते हुए अपनी बराबरीके बालकोंको पशुओंकी भाँति बलात् मार डालता॥ ४१॥
आक्रीडे क्रीडतो बालान् वयस्यानतिदारुणः।
प्रसह्य निरनुक्रोशः पशुमारममारयत्॥ ४१
वह ऐसा क्रूर और निर्दयी था कि मैदानमें खेलते हुए अपनी बराबरीके बालकोंको पशुओंकी भाँति बलात् मार डालता॥ ४१॥
श्रीमद्भागवत महापुराण 4.13.41 · गीताप्रेस, गोरखपुर (प्रथम खण्ड, पृष्ठ 477) · https://371ace2f.srimad-bhagavatam.pages.dev/4/13/41/