श्रीमद्भागवत महापुराणगीताप्रेस, गोरखपुर — मुखपृष्ठ
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॥ श्रीहरिः ॥

श्लोक 4.18.27

चतुर्थ स्कन्ध · अध्याय 18 · अथाष्टादशोऽध्यायः

एवं पृथ्वादयः पृथ्वीमन्‍नादाः स्वन्‍नमात्मनः।

दोहवत्सादिभेदेन क्षीरभेदं कुरूद्वह॥ २७

evaṃ pṛthvādayaḥ pṛthvīmannādāḥ svannamātmanaḥ|

dohavatsādibhedena kṣīrabhedaṃ kurūdvaha|| 27

अर्थ

कुरुश्रेष्ठ विदुरजी! इस प्रकार पृथु आदि सभी अन्‍न-भोजियोंने भिन्‍न-भिन्‍न दोहन-पात्र और वत्सोंके द्वारा अपने-अपने विभिन्‍न अन्‍नरूप दूध पृथ्वीसे दुहे॥ २७॥

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