इस प्रकार समस्त सभासदोंसे भलीभाँति सम्मान प्राप्त करके तेजस्वी दक्ष जगत्पिता ब्रह्माजीको प्रणाम कर उनकी आज्ञासे अपने आसनपर बैठ गये॥ ७॥
सदसस्पतिभिर्दक्षो भगवान् साधु सत्कृतः।
अजं लोकगुरुं नत्वा निषसाद तदाज्ञया॥ ७
इस प्रकार समस्त सभासदोंसे भलीभाँति सम्मान प्राप्त करके तेजस्वी दक्ष जगत्पिता ब्रह्माजीको प्रणाम कर उनकी आज्ञासे अपने आसनपर बैठ गये॥ ७॥
श्रीमद्भागवत महापुराण 4.2.7 · गीताप्रेस, गोरखपुर (प्रथम खण्ड, पृष्ठ 412) · https://srimad-bhagavatam.vidhyamitra.com/4/2/7/