बाह्य जगत्में भी देखा जाता है कि जल, दर्पण आदि निमित्तोंके रहनेपर ही अपने बिम्ब और प्रतिबिम्बका भेद दिखायी देता है, अन्य समय नहीं॥ २९॥
निमित्ते सति सर्वत्र जलादावपि पूरुषः।
आत्मनश्च परस्यापि भिदां पश्यति नान्यदा॥ २९
बाह्य जगत्में भी देखा जाता है कि जल, दर्पण आदि निमित्तोंके रहनेपर ही अपने बिम्ब और प्रतिबिम्बका भेद दिखायी देता है, अन्य समय नहीं॥ २९॥
श्रीमद्भागवत महापुराण 4.22.29 · गीताप्रेस, गोरखपुर (प्रथम खण्ड, पृष्ठ 515) · https://srimad-bhagavatam.vidhyamitra.com/4/22/29/