श्रीमद्भागवत महापुराणगीताप्रेस, गोरखपुर — मुखपृष्ठ
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॥ श्रीहरिः ॥

श्लोक 4.28.42

चतुर्थ स्कन्ध · अध्याय 28 · अथाष्टाविंशोऽध्यायः

परे ब्रह्मणि चात्मानं परं ब्रह्म तथाऽऽत्मनि।

वीक्षमाणो विहायेक्षामस्मादुपरराम ह॥ ४२

pare brahmaṇi cātmānaṃ paraṃ brahma tathā''tmani|

vīkṣamāṇo vihāyekṣāmasmādupararāma ha|| 42

अर्थ

फिर अपनी आत्माको परब्रह्ममें और परब्रह्मको आत्मामें अभिन्‍नरूपसे देखा और अन्तमें इस अभेद चिन्तनको भी त्यागकर सर्वथा शान्त हो गये॥ ४२॥✎ 1341

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