भगवान् ब्रह्माजी और सर्वान्तर्यामी श्रीनारायण पहलेसे ही इस भावी उत्पातको जानते थे, इसीसे वे दक्षके यज्ञमें नहीं गये थे ॥ ३॥✎ 1918
उपलभ्य पुरैवैतद्भगवानब्जसम्भवः।
नारायणश्च विश्वात्मा न कस्याध्वरमीयतुः॥ ३
भगवान् ब्रह्माजी और सर्वान्तर्यामी श्रीनारायण पहलेसे ही इस भावी उत्पातको जानते थे, इसीसे वे दक्षके यज्ञमें नहीं गये थे ॥ ३॥
श्रीमद्भागवत महापुराण 4.6.3 · गीताप्रेस, गोरखपुर (प्रथम खण्ड, पृष्ठ 428) · https://srimad-bhagavatam.vidhyamitra.com/4/6/3/इस श्लोक और इसके अर्थमें की गयी शुद्धियाँ (1)
#1918 मुद्रणकी अपनी भूल (गीताप्रेसके पुराने संस्करणों और ग्रन्थकी अपनी गणनासे): यज्ञ-स्वरूप → यज्ञस्वरूप