श्रीमद्भागवत महापुराणगीताप्रेस, गोरखपुर — मुखपृष्ठ
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॥ श्रीहरिः ॥

श्लोक 4.7.22

चतुर्थ स्कन्ध · अध्याय 7 · अथ सप्तमोऽध्यायः

तमुपागतमालक्ष्य सर्वे सुरगणादयः।

प्रणेमुः सहसोत्थाय ब्रह्मेन्द्रत्र्यक्षनायकाः॥ २२

tamupāgatamālakṣya sarve suragaṇādayaḥ|

praṇemuḥ sahasotthāya brahmendratryakṣanāyakāḥ|| 22

अर्थ

भगवान् पधारे हैं—यह देखकर इन्द्र, ब्रह्मा और महादेवजी आदि देवेश्‍वरोंसहित समस्त देवता, गन्धर्व और ऋषि आदिने सहसा खड़े होकर उन्हें प्रणाम किया॥ २२॥✎ 363

इस श्लोक और इसके अर्थमें की गयी शुद्धियाँ (1)
  • #363 शब्दोंके बीचका स्थान: भगवान् की → भगवान्‌की

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