श्रीमद्भागवत महापुराणगीताप्रेस, गोरखपुर — मुखपृष्ठ
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॥ श्रीहरिः ॥

श्लोक 4.8.32

चतुर्थ स्कन्ध · अध्याय 8 · अथाष्टमोऽध्यायः

अतो निवर्ततामेष निर्बन्धस्तव निष्फलः।

यतिष्यति भवान् काले श्रेयसां समुपस्थिते॥ ३२

ato nivartatāmeṣa nirbandhastava niṣphalaḥ|

yatiṣyati bhavān kāle śreyasāṃ samupasthite|| 32

अर्थ

इसलिये तू यह व्यर्थका हठ छोड़ दे और घर लौट जा; बड़ा होनेपर जब परमार्थ-साधनका समय आवे, तब उसके लिये प्रयत्न कर लेना॥ ३२॥✎ 367 368

इस श्लोक और इसके अर्थमें की गयी शुद्धियाँ (2)
  • #367 शब्दोंके बीचका स्थान: भगवान् की → भगवान्‌की
  • #368 शब्दोंके बीचका स्थान: भगवान् की → भगवान्‌की

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