इसलिये तू यह व्यर्थका हठ छोड़ दे और घर लौट जा; बड़ा होनेपर जब परमार्थ-साधनका समय आवे, तब उसके लिये प्रयत्न कर लेना॥ ३२॥✎ 367368
अतो निवर्ततामेष निर्बन्धस्तव निष्फलः।
यतिष्यति भवान् काले श्रेयसां समुपस्थिते॥ ३२
इसलिये तू यह व्यर्थका हठ छोड़ दे और घर लौट जा; बड़ा होनेपर जब परमार्थ-साधनका समय आवे, तब उसके लिये प्रयत्न कर लेना॥ ३२॥
श्रीमद्भागवत महापुराण 4.8.32 · गीताप्रेस, गोरखपुर (प्रथम खण्ड, पृष्ठ 446) · https://srimad-bhagavatam.vidhyamitra.com/4/8/32/इस श्लोक और इसके अर्थमें की गयी शुद्धियाँ (2)