श्रीमद्भागवत महापुराणगीताप्रेस, गोरखपुर — मुखपृष्ठ
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॥ श्रीहरिः ॥

श्लोक 8.19.16

अष्टम स्कन्ध · अध्याय 19 · अथैकोनविंशोऽध्यायः

तस्मात् त्वत्तो महीमीषद् वृणेऽहं वरदर्षभात्।

पदानि त्रीणि दैत्येन्द्र संमितानि पदा मम॥ १६

tasmāt tvatto mahīmīṣad vṛṇe'haṃ varadarṣabhāt|

padāni trīṇi daityendra saṃmitāni padā mama|| 16

अर्थ

दैत्येन्द्र! आप मुँहमाँगी वस्तु देनेवालोंमें श्रेष्ठ हैं। इसीसे मैं आपसे थोड़ी-सी पृथ्वी—केवल अपने पैरोंसे तीन डग माँगता हूँ॥ १६॥✎ 793

इस श्लोक और इसके अर्थमें की गयी शुद्धियाँ (1)
  • #793 शब्दोंके बीचका स्थान: विष्णुभगवान् को → विष्णुभगवान्‌को

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