श्रीमद्भागवत महापुराणगीताप्रेस, गोरखपुर — मुखपृष्ठ
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॥ श्रीहरिः ॥

श्लोक 8.2.12

अष्टम स्कन्ध · अध्याय 2 · अथ द्वितीयोऽध्यायः

मधूकैः सालतालैश्‍च तमालैरसनार्जुनैः।

अरिष्टोदुम्बरप्लक्षैर्वटैः किंशुकचन्दनैः॥ १२

madhūkaiḥ sālatālaiśca tamālairasanārjunaiḥ|

ariṣṭodumbaraplakṣairvaṭaiḥ kiṃśukacandanaiḥ|| 12

अर्थ

उसमें सब ओर ऐसे दिव्य वृक्ष शोभायमान थे, जो फलों और फूलोंसे सर्वदा लदे ही रहते थे। उस उद्यानमें मन्दार, पारिजात, गुलाब, अशोक, चम्पा, तरह-तरहके आम, प्रियाल, कटहल, आमड़ा, सुपारी, नारियल, खजूर, बिजौरा, महुआ, साखू, ताड़, तमाल, असन, अर्जुन, रीठा, गूलर, पाकर, बरगद, पलास, चन्दन, नीम, कचनार, साल, देवदारु, दाख, ईख, केला, जामुन, बेर, रुद्राक्ष, हर्रे, आँवला, बेल, कैथ, नीबू और भिलावे आदिके वृक्ष लहराते रहते थे। उस उद्यानमें एक बड़ा भारी सरोवर था। उसमें सुनहले कमल खिल रहे थे॥ १०—१४॥

यह अर्थ श्लोक 10–14 का एक साथ है, जैसा मुद्रित ग्रन्थमें।

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