भगवान् राजा सत्यव्रतको यह आदेश देकर अन्तर्धान हो गये। अतः अब राजा सत्यव्रत उसी समयकी प्रतीक्षा करने लगे, जिसके लिये भगवान्ने आज्ञा दी थी॥ ३९॥✎ 837
इत्थमादिश्य राजानं हरिरन्तरधीयत।
सोऽन्ववैक्षत तं कालं यं हृषीकेश आदिशत्॥ ३९
भगवान् राजा सत्यव्रतको यह आदेश देकर अन्तर्धान हो गये। अतः अब राजा सत्यव्रत उसी समयकी प्रतीक्षा करने लगे, जिसके लिये भगवान्ने आज्ञा दी थी॥ ३९॥
श्रीमद्भागवत महापुराण 8.24.39 · गीताप्रेस, गोरखपुर (प्रथम खण्ड, पृष्ठ 1018) · https://srimad-bhagavatam.vidhyamitra.com/8/24/39/इस श्लोक और इसके अर्थमें की गयी शुद्धियाँ (1)