भगवान्ने मोहिनीरूपमें यह विचार किया कि असुर तो जन्मसे ही क्रूर स्वभाववाले हैं। इनको अमृत पिलाना सर्पोंको दूध पिलानेके समान बड़ा अन्याय होगा। इसलिये उन्होंने असुरोंको अमृतमें भाग नहीं दिया॥ १९॥✎ 719720
असुराणां सुधादानं सर्पाणामिव दुर्नयम्।
मत्वा जातिनृशंसानां न तां व्यभजदच्युतः॥ १९
भगवान्ने मोहिनीरूपमें यह विचार किया कि असुर तो जन्मसे ही क्रूर स्वभाववाले हैं। इनको अमृत पिलाना सर्पोंको दूध पिलानेके समान बड़ा अन्याय होगा। इसलिये उन्होंने असुरोंको अमृतमें भाग नहीं दिया॥ १९॥
श्रीमद्भागवत महापुराण 8.9.19 · गीताप्रेस, गोरखपुर (प्रथम खण्ड, पृष्ठ 949) · https://srimad-bhagavatam.vidhyamitra.com/8/9/19/इस श्लोक और इसके अर्थमें की गयी शुद्धियाँ (2)