॥ श्रीहरिः ॥
पारायण · प्रयोग 57 · 60 दिन
(५७) ऋतुपारायण (दो महीनेका)
दिन |
विश्रामस्थल-स्कन्ध |
अध्याय |
योग अध्याय |
१ |
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६ |
६ |
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६ |
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५ |
५ |
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९ |
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६ |
६ |
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७ |
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११ |
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५ |
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६० |
१२ |
१३* |
८ |
पाठ-क्रम
- दिन 1प्रथम स्कन्ध · अध्याय 1 से प्रथम स्कन्ध · अध्याय 6 तक6 अध्याय
- दिन 2प्रथम स्कन्ध · अध्याय 7 से प्रथम स्कन्ध · अध्याय 11 तक5 अध्याय
पाठ आरम्भ: 1.7 · विश्राम: 1.11
इस दिनके 5 अध्याय
- 1.7 अश्वत्थामाद्वारा द्रौपदीके पुत्रोंका मारा जाना और अर्जुनके द्वारा अश्वत्थामाका मानमर्दन
- 1.8 गर्भमें परीक्षित्की रक्षा, कुन्तीके द्वारा भगवान्की स्तुति और युधिष्ठिरका शोक
- 1.9 युधिष्ठिरादिका भीष्मजीके पास जाना और भगवान् श्रीकृष्णकी स्तुति करते हुए भीष्मजीका प्राणत्याग करना
- 1.10 श्रीकृष्णका द्वारका-गमन
- 1.11 द्वारकामें श्रीकृष्णका राजोचित स्वागत
- दिन 3प्रथम स्कन्ध · अध्याय 12 से प्रथम स्कन्ध · अध्याय 15 तक4 अध्याय
- दिन 4प्रथम स्कन्ध · अध्याय 16 से प्रथम स्कन्ध · अध्याय 19 तक4 अध्याय
- दिन 5द्वितीय स्कन्ध · अध्याय 1 से द्वितीय स्कन्ध · अध्याय 6 तक6 अध्याय
इस दिनके 6 अध्याय
- 2.1 ध्यान-विधि और भगवान्के विराट्स्वरूपका वर्णन
- 2.2 भगवान्के स्थूल और सूक्ष्मरूपोंकी धारणा तथा क्रममुक्ति और सद्योमुक्तिका वर्णन
- 2.3 कामनाओंके अनुसार विभिन्न देवताओंकी उपासना तथा भगवद्भक्तिके प्राधान्यका निरूपण
- 2.4 राजाका सृष्टिविषयक प्रश्न और शुकदेवजीका कथारम्भ
- 2.5 सृष्टि-वर्णन
- 2.6 विराट्स्वरूपकी विभूतियोंका वर्णन
- दिन 6द्वितीय स्कन्ध · अध्याय 7 से द्वितीय स्कन्ध · अध्याय 10 तक4 अध्याय
- दिन 7तृतीय स्कन्ध · अध्याय 1 से तृतीय स्कन्ध · अध्याय 6 तक6 अध्याय
- दिन 8तृतीय स्कन्ध · अध्याय 7 से तृतीय स्कन्ध · अध्याय 11 तक5 अध्याय
- दिन 9तृतीय स्कन्ध · अध्याय 12 से तृतीय स्कन्ध · अध्याय 16 तक5 अध्याय
- दिन 10तृतीय स्कन्ध · अध्याय 17 से तृतीय स्कन्ध · अध्याय 20 तक4 अध्याय
- दिन 11तृतीय स्कन्ध · अध्याय 21 से तृतीय स्कन्ध · अध्याय 24 तक4 अध्याय
- दिन 12तृतीय स्कन्ध · अध्याय 25 से तृतीय स्कन्ध · अध्याय 28 तक4 अध्याय
- दिन 13तृतीय स्कन्ध · अध्याय 29 से तृतीय स्कन्ध · अध्याय 33 तक5 अध्याय
- दिन 14चतुर्थ स्कन्ध · अध्याय 1 से चतुर्थ स्कन्ध · अध्याय 7 तक7 अध्याय
- दिन 15चतुर्थ स्कन्ध · अध्याय 8 से चतुर्थ स्कन्ध · अध्याय 12 तक5 अध्याय
- दिन 16चतुर्थ स्कन्ध · अध्याय 13 से चतुर्थ स्कन्ध · अध्याय 18 तक6 अध्याय
- दिन 17चतुर्थ स्कन्ध · अध्याय 19 से चतुर्थ स्कन्ध · अध्याय 24 तक6 अध्याय
- दिन 18चतुर्थ स्कन्ध · अध्याय 25 से चतुर्थ स्कन्ध · अध्याय 31 तक7 अध्याय
पाठ आरम्भ: 4.25 · विश्राम: 4.31
इस दिनके 7 अध्याय
- 4.25 पुरंजनोपाख्यानका प्रारम्भ
- 4.26 राजा पुरंजनका शिकार खेलने वनमें जाना और रानीका कुपित होना
- 4.27 पुरंजनपुरीपर चण्डवेगकी चढ़ाई तथा कालकन्याका चरित्र
- 4.28 पुरंजनको स्त्रीयोनिकी प्राप्ति और अविज्ञातके उपदेशसे उसका मुक्त होना
- 4.29 पुरंजनोपाख्यानका तात्पर्य
- 4.30 प्रचेताओंको श्रीविष्णुभगवान्का वरदान
- 4.31 प्रचेताओंको श्रीनारदजीका उपदेश और उनका परमपद-लाभ
- दिन 19पञ्चम स्कन्ध · अध्याय 1 से पञ्चम स्कन्ध · अध्याय 6 तक6 अध्याय
- दिन 20पञ्चम स्कन्ध · अध्याय 7 से पञ्चम स्कन्ध · अध्याय 11 तक5 अध्याय
- दिन 21पञ्चम स्कन्ध · अध्याय 12 से पञ्चम स्कन्ध · अध्याय 15 तक4 अध्याय
- दिन 22पञ्चम स्कन्ध · अध्याय 16 से पञ्चम स्कन्ध · अध्याय 20 तक5 अध्याय
- दिन 23पञ्चम स्कन्ध · अध्याय 21 से पञ्चम स्कन्ध · अध्याय 26 तक6 अध्याय
- दिन 24षष्ठ स्कन्ध · अध्याय 1 से षष्ठ स्कन्ध · अध्याय 7 तक7 अध्याय
इस दिनके 7 अध्याय
- 6.1 अजामिलोपाख्यानका प्रारम्भ
- 6.2 विष्णुदूतोंद्वारा भागवतधर्म-निरूपण और अजामिलका परमधामगमन
- 6.3 यम और यमदूतोंका संवाद
- 6.4 दक्षके द्वारा भगवान्की स्तुति और भगवान्का प्रादुर्भाव
- 6.5 श्रीनारदजीके उपदेशसे दक्षपुत्रोंकी विरक्ति तथा नारदजीको दक्षका शाप
- 6.6 दक्षप्रजापतिकी साठ कन्याओंके वंशका विवरण
- 6.7 बृहस्पतिजीके द्वारा देवताओंका त्याग और विश्वरूपका देवगुरुके रूपमें वरण
- दिन 25षष्ठ स्कन्ध · अध्याय 8 से षष्ठ स्कन्ध · अध्याय 13 तक6 अध्याय
पाठ आरम्भ: 6.8 · विश्राम: 6.13
इस दिनके 6 अध्याय
- 6.8 नारायणकवचका उपदेश
- 6.9 विश्वरूपका वध, वृत्रासुरद्वारा देवताओंकी हार और भगवान्की प्रेरणासे देवताओंका दधीचि ऋषिके पास जाना
- 6.10 देवताओंद्वारा दधीचि ऋषिकी अस्थियोंसे वज्र-निर्माण और वृत्रासुरकी सेनापर आक्रमण
- 6.11 वृत्रासुरकी वीरवाणी और भगवत्प्राप्ति
- 6.12 वृत्रासुरका वध
- 6.13 इन्द्रपर ब्रह्महत्याका आक्रमण
- दिन 26षष्ठ स्कन्ध · अध्याय 14 से षष्ठ स्कन्ध · अध्याय 19 तक6 अध्याय
- दिन 27सप्तम स्कन्ध · अध्याय 1 से सप्तम स्कन्ध · अध्याय 5 तक5 अध्याय
- दिन 28सप्तम स्कन्ध · अध्याय 6 से सप्तम स्कन्ध · अध्याय 10 तक5 अध्याय
पाठ आरम्भ: 7.6 · विश्राम: 7.10
इस दिनके 5 अध्याय
- दिन 29सप्तम स्कन्ध · अध्याय 11 से सप्तम स्कन्ध · अध्याय 15 तक5 अध्याय
- दिन 30अष्टम स्कन्ध · अध्याय 1 से अष्टम स्कन्ध · अध्याय 4 तक4 अध्याय
- दिन 31अष्टम स्कन्ध · अध्याय 5 से अष्टम स्कन्ध · अध्याय 9 तक5 अध्याय
इस दिनके 5 अध्याय
- दिन 32अष्टम स्कन्ध · अध्याय 10 से अष्टम स्कन्ध · अध्याय 14 तक5 अध्याय
- दिन 33अष्टम स्कन्ध · अध्याय 15 से अष्टम स्कन्ध · अध्याय 18 तक4 अध्याय
- दिन 34अष्टम स्कन्ध · अध्याय 19 से अष्टम स्कन्ध · अध्याय 24 तक6 अध्याय
पाठ आरम्भ: 8.19 · विश्राम: 8.24
इस दिनके 6 अध्याय
- 8.19 भगवान् वामनका बलिसे तीन पग पृथ्वी माँगना, बलिका वचन देना और शुक्राचार्यजीका उन्हें रोकना
- 8.20 भगवान् वामनजीका विराट्रूप होकर दो ही पगसे पृथ्वी और स्वर्गको नाप लेना
- 8.21 बलिका बाँधा जाना
- 8.22 बलिके द्वारा भगवान्की स्तुति और भगवान्का उसपर प्रसन्न होना
- 8.23 बलिका बन्धनसे छूटकर सुतललोकको जाना
- 8.24 भगवान्के मत्स्यावतारकी कथा
- दिन 35नवम स्कन्ध · अध्याय 1 से नवम स्कन्ध · अध्याय 5 तक5 अध्याय
- दिन 36नवम स्कन्ध · अध्याय 6 से नवम स्कन्ध · अध्याय 12 तक7 अध्याय
- दिन 37नवम स्कन्ध · अध्याय 13 से नवम स्कन्ध · अध्याय 17 तक5 अध्याय
- दिन 38नवम स्कन्ध · अध्याय 18 से नवम स्कन्ध · अध्याय 24 तक7 अध्याय
- दिन 39दशम स्कन्ध · अध्याय 1 से दशम स्कन्ध · अध्याय 6 तक6 अध्याय
पाठ आरम्भ: 10.1 · विश्राम: 10.6
इस दिनके 6 अध्याय
- 10.1 भगवान्के द्वारा पृथ्वीको आश्वासन, वसुदेव-देवकीका विवाह और कंसके द्वारा देवकीके छः पुत्रोंकी हत्या
- 10.2 भगवान्का गर्भ-प्रवेश और देवताओंद्वारा गर्भ-स्तुति
- 10.3 भगवान् श्रीकृष्णका प्राकट्य
- 10.4 कंसके हाथसे छूटकर योगमायाका आकाशमें जाकर भविष्यवाणी करना
- 10.5 गोकुलमें भगवान्का जन्ममहोत्सव
- 10.6 पूतना-उद्धार
- दिन 40दशम स्कन्ध · अध्याय 7 से दशम स्कन्ध · अध्याय 11 तक5 अध्याय
- दिन 41दशम स्कन्ध · अध्याय 12 से दशम स्कन्ध · अध्याय 17 तक6 अध्याय
- दिन 42दशम स्कन्ध · अध्याय 18 से दशम स्कन्ध · अध्याय 23 तक6 अध्याय
- दिन 43दशम स्कन्ध · अध्याय 24 से दशम स्कन्ध · अध्याय 28 तक5 अध्याय
- दिन 44दशम स्कन्ध · अध्याय 29 से दशम स्कन्ध · अध्याय 33 तक5 अध्याय
- दिन 45दशम स्कन्ध · अध्याय 34 से दशम स्कन्ध · अध्याय 38 तक5 अध्याय
- दिन 46दशम स्कन्ध · अध्याय 39 से दशम स्कन्ध · अध्याय 44 तक6 अध्याय
- दिन 47दशम स्कन्ध · अध्याय 45 से दशम स्कन्ध · अध्याय 49 तक5 अध्याय
- दिन 48दशम स्कन्ध · अध्याय 50 से दशम स्कन्ध · अध्याय 55 तक6 अध्याय
पाठ आरम्भ: 10.50 · विश्राम: 10.55
इस दिनके 6 अध्याय
- 10.50 जरासन्धसे युद्ध और द्वारकापुरीका निर्माण
- 10.51 कालयवनका भस्म होना, मुचुकुन्दकी कथा
- 10.52 द्वारकागमन, श्रीबलरामजीका विवाह तथा श्रीकृष्णके पास रुक्मिणीजीका सन्देशा लेकर ब्राह्मणका आना
- 10.53 रुक्मिणीहरण
- 10.54 शिशुपालके साथी राजाओंकी और रुक्मीकी हार तथा श्रीकृष्ण-रुक्मिणी-विवाह
- 10.55 प्रद्युम्नका जन्म और शम्बरासुरका वध
- दिन 49दशम स्कन्ध · अध्याय 56 से दशम स्कन्ध · अध्याय 61 तक6 अध्याय
पाठ आरम्भ: 10.56 · विश्राम: 10.61
इस दिनके 6 अध्याय
- 10.56 स्यमन्तकमणिकी कथा, जाम्बवती और सत्यभामाके साथ श्रीकृष्णका विवाह
- 10.57 स्यमन्तक-हरण, शतधन्वाका उद्धार और अक्रूरजीको फिरसे द्वारका बुलाना
- 10.58 भगवान् श्रीकृष्णके अन्यान्य विवाहोंकी कथा
- 10.59 भौमासुरका उद्धार और सोलह हजार एक सौ राज- कन्याओंके साथ भगवान्का विवाह
- 10.60 श्रीकृष्ण-रुक्मिणी-संवाद
- 10.61 भगवान्की सन्ततिका वर्णन तथा अनिरुद्धके विवाहमें रुक्मीका मारा जाना
- दिन 50दशम स्कन्ध · अध्याय 62 से दशम स्कन्ध · अध्याय 68 तक7 अध्याय
- दिन 51दशम स्कन्ध · अध्याय 69 से दशम स्कन्ध · अध्याय 75 तक7 अध्याय
पाठ आरम्भ: 10.69 · विश्राम: 10.75
इस दिनके 7 अध्याय
- 10.69 देवर्षि नारदजीका भगवान्की गृहचर्या देखना
- 10.70 भगवान् श्रीकृष्णकी नित्यचर्या और उनके पास जरासन्धके कैदी राजाओंके दूतका आना
- 10.71 श्रीकृष्णभगवान्का इन्द्रप्रस्थ पधारना
- 10.72 पाण्डवोंके राजसूययज्ञका आयोजन और जरासन्धका उद्धार
- 10.73 जरासन्धके जेलसे छूटे हुए राजाओंकी बिदाई और भगवान्का इन्द्रप्रस्थ लौट आना
- 10.74 भगवान्की अग्रपूजा और शिशुपालका उद्धार
- 10.75 राजसूय यज्ञकी पूर्ति और दुर्योधनका अपमान
- दिन 52दशम स्कन्ध · अध्याय 76 से दशम स्कन्ध · अध्याय 81 तक6 अध्याय
- दिन 53दशम स्कन्ध · अध्याय 82 से दशम स्कन्ध · अध्याय 88 तक7 अध्याय
पाठ आरम्भ: 10.82 · विश्राम: 10.88
इस दिनके 7 अध्याय
- 10.82 भगवान् श्रीकृष्ण-बलरामसे गोप-गोपियोंकी भेंट
- 10.83 भगवान्की पटरानियोंके साथ द्रौपदीकी बातचीत
- 10.84 वसुदेवजीका यज्ञोत्सव
- 10.85 श्रीभगवान्के द्वारा वसुदेवजीको ब्रह्मज्ञानका उपदेश तथा देवकीजीके छः पुत्रोंको लौटा लाना
- 10.86 सुभद्राहरण और भगवान्का मिथिलापुरीमें राजा जनक और श्रुतदेव ब्राह्मणके घर एक ही साथ जाना
- 10.87 वेदस्तुति
- 10.88 शिवजीका संकटमोचन
- दिन 54दशम स्कन्ध · अध्याय 89 से एकादश स्कन्ध · अध्याय 5 तक7 अध्याय
पाठ आरम्भ: 10.89 · विश्राम: 11.5
इस दिनके 7 अध्याय
- 10.89 भृगुजीके द्वारा त्रिदेवोंकी परीक्षा तथा भगवान्का मरे हुए ब्राह्मण-बालकोंको वापस लाना
- 10.90 भगवान् श्रीकृष्णके लीला-विहारका वर्णन
- 11.1 यदुवंशको ऋषियोंका शाप
- 11.2 वसुदेवजीके पास श्रीनारदजीका आना और उन्हें राजा जनक तथा नौ योगीश्वरोंका संवाद सुनाना
- 11.3 माया, मायासे पार होनेके उपाय तथा ब्रह्म और कर्मयोगका निरूपण
- 11.4 भगवान्के अवतारोंका वर्णन
- 11.5 भक्तिहीन पुरुषोंकी गति और भगवान्की पूजाविधिका वर्णन
- दिन 55एकादश स्कन्ध · अध्याय 6 से एकादश स्कन्ध · अध्याय 11 तक6 अध्याय
पाठ आरम्भ: 11.6 · विश्राम: 11.11
इस दिनके 6 अध्याय
- 11.6 देवताओंकी भगवान्से स्वधाम सिधारनेके लिये प्रार्थना तथा यादवोंको प्रभासक्षेत्र जानेकी तैयारी करते देखकर उद्धवका भगवान्के पास आना
- 11.7 अवधूतोपाख्यान—पृथ्वीसे लेकर कबूतरतक आठ गुरुओंकी कथा
- 11.8 अवधूतोपाख्यान—अजगरसे लेकर पिंगलातक नौ गुरुओंकी कथा
- 11.9 अवधूतोपाख्यान—कुररसे लेकर भृंगीतक सात गुरुओंकी कथा
- 11.10 लौकिक तथा पारलौकिक भोगोंकी असारताका निरूपण
- 11.11 बद्ध, मुक्त और भक्तजनोंके लक्षण
- दिन 56एकादश स्कन्ध · अध्याय 12 से एकादश स्कन्ध · अध्याय 18 तक7 अध्याय
- दिन 57एकादश स्कन्ध · अध्याय 19 से एकादश स्कन्ध · अध्याय 23 तक5 अध्याय
- दिन 58एकादश स्कन्ध · अध्याय 24 से एकादश स्कन्ध · अध्याय 29 तक6 अध्याय
- दिन 59एकादश स्कन्ध · अध्याय 30 से द्वादश स्कन्ध · अध्याय 5 तक7 अध्याय
- दिन 60द्वादश स्कन्ध · अध्याय 6 से द्वादश स्कन्ध · अध्याय 13 तक8 अध्याय
पाठ आरम्भ: 12.6 · विश्राम: 12.13
इस दिनके 8 अध्याय
- 12.6 परीक्षित्की परमगति, जनमेजयका सर्पसत्र और वेदोंके शाखाभेद
- 12.7 अथर्ववेदकी शाखाएँ और पुराणोंके लक्षण
- 12.8 मार्कण्डेयजीकी तपस्या और वर-प्राप्ति
- 12.9 मार्कण्डेयजीका माया-दर्शन
- 12.10 मार्कण्डेयजीको भगवान् शंकरका वरदान
- 12.11 भगवान्के अंग, उपांग और आयुधोंका रहस्य तथा विभिन्न सूर्यगणोंका वर्णन
- 12.12 श्रीमद्भागवतकी संक्षिप्त विषय-सूची
- 12.13 विभिन्न पुराणोंकी श्लोक-संख्या और श्रीमद्भागवतकी महिमा